Manastva Clinic

एंग्ज़ायटी क्या है और काउंसलिंग की ज़रूरत कब पड़ती है?

· Ravi Singh · 2 min read

एंग्ज़ायटीकाउंसलिंगतनाव

परीक्षा, नौकरी या परिवार को लेकर चिंता होना बिल्कुल सामान्य है। लेकिन जब यह चिंता बहुत ज़्यादा हो जाए, बार-बार लौटे और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दखल देने लगे, तब इसे एंग्ज़ायटी की नज़र से देखना ज़रूरी हो जाता है।

चिंता और एंग्ज़ायटी में फ़र्क

सामान्य चिंता किसी ख़ास वजह से आती है और वजह सुलझते ही कम हो जाती है। एंग्ज़ायटी में डर या बेचैनी अक्सर वजह के अनुपात में कहीं ज़्यादा होती है, या बिना किसी साफ़ वजह के भी बनी रहती है।

आम लक्षण

कब किसी मनोवैज्ञानिक से बात करें

अगर ये परेशानियाँ कई हफ़्तों से बनी हुई हैं, या आपकी नींद, पढ़ाई, काम और रिश्तों पर असर डाल रही हैं, तो पेशेवर मदद लेना समझदारी है। इसके लिए हालात "बहुत बिगड़ने" का इंतज़ार ज़रूरी नहीं है।

काउंसलिंग में क्या होता है

काउंसलिंग में आप सुरक्षित और गोपनीय माहौल में अपनी बात रखते हैं। CBT जैसी थेरेपी में सोचने और प्रतिक्रिया देने के पैटर्न को पहचानना और उन्हें बदलना सिखाया जाता है।

छोटे कदम जो रोज़ मदद कर सकते हैं

  1. धीमी गहरी साँस लेने का अभ्यास करें
  2. सोने और उठने का समय तय रखें
  3. चाय-कॉफ़ी और स्क्रीन टाइम रात में कम करें
  4. अपनी चिंता किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें

ये कदम सहारा दे सकते हैं, पर पेशेवर जाँच की जगह नहीं ले सकते।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी मनोवैज्ञानिक की जाँच, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अगर आप या कोई और संकट में है या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो तुरंत Tele-MANAS (14416) पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएँ।

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